Beautiful Hindi Motivational Shayari

Chuu le aasmaan,
Zamin ki tu talash naa kar
Mazaa le le zindagi kaa ,
Khusiyon ki tu talash naa kar
Gamoh se door hokar,
Teri takdeer bhi badal jaayegi
Muskurana sikh le,
Uski wajay ki talash naa kar…

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What is Happiness ?

Happiness is when what you think, what you say, and what you do are in harmony”.

Gandhi

Share Life With True Friends

♥♥
Ek Sach Chupa Hota Hai :- Jab Koi
Kisi Ko Kehta
Hai Ki “Mazaak Tha Yaar”.
Ek Feeling Chupi Hoti Hai :- Jab Koi Kehta
Hai “Mujhe Koi Farq Nahi Padta”.
♥♥
Ek Dard Chupa Hota Hai :- Jab Koi
Kehta
Hai “Its Ok”. Ek Zarurat Chupi Hoti Hai :- Jab Koi
Kehta Hai
“Mujhe Akela Chhod Do”.
♥♥
Ek Gehri Baat Chupi Hoti Hai :- Jab
Koi Kehta Hai “Pata Nahi”.
Ek Samundar Chupa Hota Hai Baato
Ka :- Jab Koi
“Khamosh Rehta Hai”…..
♥♥
Isi liye ek Open Heart Surgery unit k baahar likha
huwa tha k….
“Agar Dil Khol Lete Apne Yaaro Ke
Saath,
To Aaj Kholna Na Padta Auozaro K
Saath” ……!!!!!
By – Ritesh Rai

Simple vs Smart !

बनना है तो सरल बनो स्मार्ट नहीं,
क्योंकि …
हमे ईश्वर ने बनाया है मोबाइल कम्पनी ने नही..!

Hindi Shayari

अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता !
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता !
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का !
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता !

तीन चोर : Three Thieves Moral Story

three-thieves-hindi-storyबहुत दिनों की बात है। किसी शहर में रमन, घीसा और राका तीन चोर रहते थे। तीनों को थोड़ा-थोड़ा विद्या का ज्ञान था। तीनों चोरों को विधा का ज्ञान प्राप्त होने के कारण बहुत घमण्ड था। विद्या द्वारा तीनों चोर शहर में बड़े-बड़े लोहे की तिजोरियों को तोड़ देते थे और बैंकों को लूट लिया करते थे। इस तरह तीनों चोरों ने शहर के लोगों की नाक में दम कर रखा था।

एक बार तीनों चोरों ने एक बड़े बैंक में डकैती करके सारा माल उड़ा दिया। तब पुलिस को खबर हुई तो तीनों चोरों को पकड़ने के लिए तलाश करने लगी। मगर तीनों चोर पास ही के एक घने जंगल में भाग गए।

तीनों चोरों ने देखा कि जंगल में बहुत-सी हड्डियां बिखरी पड़ी हैं। रमन ने अनुमान लगाकर कहा- ”ये तो किसी शेर की हड्डियां हैं। मैं चाहूं तो सभी हड्डियों को अपनी विद्या के ज्ञान द्वारा जोड़ सकता हूं।” घीसा को भी विद्या का घमंड था सो, वह बोला – ”अगर ये शेर की हड्डियां हैं तो मैं इनको अपनी विधा द्वारा शेर की खाल तैयार कर उसमें डाल सकता हूं।” रमन और घीसा की बात सुनकर राका का भी घमण्ड उमड़ पड़ा और उसने कहा – ”तुम दोनों इतना काम कर सकते हो तो मैं भी अपनी विद्या द्वारा इसमें प्राण डाल सकता हूं।”

तीनों चोर अपनी विद्या का प्रयोग करने लगे। कुछ देर बाद रमन ने सारी हड्डियों को जोड़ दिया और घीसा ने शेर की हुबहू जान जान डाल दी। थोड़ी देर में तीनों चोर सामने एक जीवित भयानक शेर को देखकर थर-थर कांपने लगे। मगर शेर के पेट में तो एक दाना नहीं था। वह भूख के मारे गरजता हुआ तीनों चोरों पर हमला कर बैठा और मारकर खा गया। शेर मस्त होकर घने जंगल की ओर चल दिया।

कहानी से शिक्षा

दोस्तों, इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए। घमण्डी को हमेशा दुख का ही सामना करना पड़ता है। यदि तीनों चोर अपनी विद्या का घमण्ड न करते तो उन्हें जान से हाथ न धोने पड़ते। हमें अपनी विद्या का प्रयोग सोच-समझकर करना चाहिए।

बुलंद हौसले की कहानी : A Story of Courage

आप माने या ना माने परन्तु परेशानियाँ हमारे जीवन की एक सच्चाई है। कोई इस सच्चाई को स्वीकार कर लेता है तो कोई नहीं। लाईफ के हर मोड़ पर हमें इनका सामना करना ही पड़ता है। इसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।

कभी-कभी समस्याओं का सामना करते-करते हम थक से जाते है। ऐसे वक्त पर हम हताशा से घिरे होते है। ऐसे समय में हमारा विवेक सही से काम नहीं करता और हम कुछ समझ नहीं पाते की क्या सही है और क्या गलत। अलग-अलग लोग समस्याओं और परिस्थितियों को अलग-अलग ढंग से देखते है। कई बार जिंदगी में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। उस मुश्किल समय में कई लोग टूट जाया करते हैं तो कई उसका डट कर मुकाबला करते है।

मनोवैज्ञानिक रूप से इंसान किसी भी समस्या को दो तरीके से देखता हैः

  • समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करके (by focusing on problem)
  • समाधान पर ध्यान केन्द्रित करके (by focusing on solution)

प्राब्लम पर फोकस करने वाले लोग कई बार कठिन समय में ढेर हो जाते है। इस तरह के इंसान किसी समस्या के हल के बजाये, समस्या के बारे में ज्यादा सोचते है। वही आप अगर दूसरी तरफ देखेगे तो समाधान पर फोकस करने वाले लोग, समस्या के हल के विषय में ज्यादा सोचते है। इस तरह के लोग किसी भी मुश्किल परिस्थिति का डट कर मुकाबला करते है।

दोस्तों, यहाँ मैं आपके साथ एक ऐसे साहसिक इंसान की छोटी सी कहानी (महापुरूषों के जीवन-प्रसंग) सांझा करने जा रहा हूँ जो आपको जिंदगी में किसी भी मुसीबत से लड़ने के लिए प्रेरित करेगी। आप लोग सम्राट Napoleon Bonaparte के बारे में तो जानते ही होगें। जी हाँ, वही नेपोलियन जो फ्रांस का एक महान पराक्रमी और साहसी शासक था और जिसके शब्दकोश में ‘असंभव’ (impossible) नाम का कोई शब्द ही नहीं था। विश्व-इतिहास के पन्नों में नेपोलियन को संसार के सबसे महान और असाधारण सेनापतियों की श्रेणी में रखा जाता है। जिसके सामने कोई अवरोध टिक नहीं पाता था।

नेपोलियन के बुलंद हौसले की कहानी

सेनापति नेपोलियन कभी-कभी ऐसे कामों को किया करता था, जिन्हें सामान्य इंसान कठिन मानता है। एक बार उसने आल्पस पर्वत पार कर इटली में प्रवेश करने की उद्घोषणा की तथा अपनी सेना के साथ आगे बढ़ने लगा। आगे बढ़ते ही सेना के सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पर्वत खड़ा था, जिस पर चढ़ाई करना लगभग नामुमकिन लग रहा था। ऐसी विकट परिस्थिति को देखकर सेना में अचानक हलचल सी पैदा हो गयी। लेकिन फिर भी नेपोलियन ने सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। उसके इस आदेश को पास में ही खड़ी एक बुजुर्ग महिला सुन रही थी। उसने जैसे ही यह सुना, वह नेपोलियन के पास आकर बोली- क्या मरना चाहते हो! यहाँ जितने भी लोग आये वह यही मुँह की खाकर रह गये। अगर अपनी जिंदगी प्यारी है तो यही से लौट जाओ। बुजुर्ग की बात सुनकर सेनापति नेपोलियन के चेहरे पर एक चमक आ गयी। वह क्रोधित होने के बजाय प्रेरित हो गया और झट से अपने गले का हीरो का हार उतार उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और बोला – मैं आपका शुक्रगुजार हूँ। आपने मेरा उत्साह बढ़ा इस काम करने के लिए प्रेरित किया है परन्तु अगर मैं जीवित रह गया तो आप मेरी जय-जयकार अवश्य करना।

नेपोलियन की यह बात सुनकर उस महिला ने कहा – ‘तुम ऐसे पहले इंसान हो, जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुआ।’ जो इंसान करने या मरने और तथा कठिनाईयों का सामना करने का इरादा रखते है, वह कभी नहीं हारते।

फिर क्या था, नेपोलियन ने सफलता पूर्वक आल्पस पर्वत पर चढ़ाई कि और ईटली को जीता भी।

दोस्तों, आज हम राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर को विश्व-क्रिकेट का सबसे अच्छा खिलाड़ी क्यों मानते हैं? क्योंकि उन्होंने आवश्यकता के समय ही सबसे बेहतरीन पारियाँ खेली। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मुसीबतों का पहाड़ सिर्फ सामान्य इंसान के सामने ही आती हैं। प्रभु श्री राम के सामने भी कई मुसीबतें आई थी लेकिन उन्होंने सभी कठिनाईयों का सामना बड़े आदर्श तरीके से किया। इसलिए तो हम उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहते है। विपत्तीयाँ इंसान में आदर्शों का निर्माण करती है।

अंत में ओरिसन स्वेट मार्डेन की यह बात हमेशा याद रखियेः

”हमारी अधिकतर बाधाएँ पिघल जाएंगी, अगर उनके सामने दुबकने के बजाय हम उनसे निडरतापूर्वक निपटने का मन बनाएँ”

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