Thought for Day – 10/02/2017

“Correction does much, but encouragement does more.”

~ Johann Wolfgang von Goethe

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बुलंद हौसले की कहानी : A Story of Courage

आप माने या ना माने परन्तु परेशानियाँ हमारे जीवन की एक सच्चाई है। कोई इस सच्चाई को स्वीकार कर लेता है तो कोई नहीं। लाईफ के हर मोड़ पर हमें इनका सामना करना ही पड़ता है। इसके बिना हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।

कभी-कभी समस्याओं का सामना करते-करते हम थक से जाते है। ऐसे वक्त पर हम हताशा से घिरे होते है। ऐसे समय में हमारा विवेक सही से काम नहीं करता और हम कुछ समझ नहीं पाते की क्या सही है और क्या गलत। अलग-अलग लोग समस्याओं और परिस्थितियों को अलग-अलग ढंग से देखते है। कई बार जिंदगी में मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। उस मुश्किल समय में कई लोग टूट जाया करते हैं तो कई उसका डट कर मुकाबला करते है।

मनोवैज्ञानिक रूप से इंसान किसी भी समस्या को दो तरीके से देखता हैः

  • समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करके (by focusing on problem)
  • समाधान पर ध्यान केन्द्रित करके (by focusing on solution)

प्राब्लम पर फोकस करने वाले लोग कई बार कठिन समय में ढेर हो जाते है। इस तरह के इंसान किसी समस्या के हल के बजाये, समस्या के बारे में ज्यादा सोचते है। वही आप अगर दूसरी तरफ देखेगे तो समाधान पर फोकस करने वाले लोग, समस्या के हल के विषय में ज्यादा सोचते है। इस तरह के लोग किसी भी मुश्किल परिस्थिति का डट कर मुकाबला करते है।

दोस्तों, यहाँ मैं आपके साथ एक ऐसे साहसिक इंसान की छोटी सी कहानी (महापुरूषों के जीवन-प्रसंग) सांझा करने जा रहा हूँ जो आपको जिंदगी में किसी भी मुसीबत से लड़ने के लिए प्रेरित करेगी। आप लोग सम्राट Napoleon Bonaparte के बारे में तो जानते ही होगें। जी हाँ, वही नेपोलियन जो फ्रांस का एक महान पराक्रमी और साहसी शासक था और जिसके शब्दकोश में ‘असंभव’ (impossible) नाम का कोई शब्द ही नहीं था। विश्व-इतिहास के पन्नों में नेपोलियन को संसार के सबसे महान और असाधारण सेनापतियों की श्रेणी में रखा जाता है। जिसके सामने कोई अवरोध टिक नहीं पाता था।

नेपोलियन के बुलंद हौसले की कहानी

सेनापति नेपोलियन कभी-कभी ऐसे कामों को किया करता था, जिन्हें सामान्य इंसान कठिन मानता है। एक बार उसने आल्पस पर्वत पार कर इटली में प्रवेश करने की उद्घोषणा की तथा अपनी सेना के साथ आगे बढ़ने लगा। आगे बढ़ते ही सेना के सामने एक विशाल और गगनचुम्बी पर्वत खड़ा था, जिस पर चढ़ाई करना लगभग नामुमकिन लग रहा था। ऐसी विकट परिस्थिति को देखकर सेना में अचानक हलचल सी पैदा हो गयी। लेकिन फिर भी नेपोलियन ने सेना को चढ़ाई का आदेश दिया। उसके इस आदेश को पास में ही खड़ी एक बुजुर्ग महिला सुन रही थी। उसने जैसे ही यह सुना, वह नेपोलियन के पास आकर बोली- क्या मरना चाहते हो! यहाँ जितने भी लोग आये वह यही मुँह की खाकर रह गये। अगर अपनी जिंदगी प्यारी है तो यही से लौट जाओ। बुजुर्ग की बात सुनकर सेनापति नेपोलियन के चेहरे पर एक चमक आ गयी। वह क्रोधित होने के बजाय प्रेरित हो गया और झट से अपने गले का हीरो का हार उतार उस बुजुर्ग महिला को पहना दिया और बोला – मैं आपका शुक्रगुजार हूँ। आपने मेरा उत्साह बढ़ा इस काम करने के लिए प्रेरित किया है परन्तु अगर मैं जीवित रह गया तो आप मेरी जय-जयकार अवश्य करना।

नेपोलियन की यह बात सुनकर उस महिला ने कहा – ‘तुम ऐसे पहले इंसान हो, जो मेरी बात सुनकर हताश और निराश नहीं हुआ।’ जो इंसान करने या मरने और तथा कठिनाईयों का सामना करने का इरादा रखते है, वह कभी नहीं हारते।

फिर क्या था, नेपोलियन ने सफलता पूर्वक आल्पस पर्वत पर चढ़ाई कि और ईटली को जीता भी।

दोस्तों, आज हम राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर को विश्व-क्रिकेट का सबसे अच्छा खिलाड़ी क्यों मानते हैं? क्योंकि उन्होंने आवश्यकता के समय ही सबसे बेहतरीन पारियाँ खेली। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मुसीबतों का पहाड़ सिर्फ सामान्य इंसान के सामने ही आती हैं। प्रभु श्री राम के सामने भी कई मुसीबतें आई थी लेकिन उन्होंने सभी कठिनाईयों का सामना बड़े आदर्श तरीके से किया। इसलिए तो हम उन्हें मर्यादा पुरूषोत्तम कहते है। विपत्तीयाँ इंसान में आदर्शों का निर्माण करती है।

अंत में ओरिसन स्वेट मार्डेन की यह बात हमेशा याद रखियेः

”हमारी अधिकतर बाधाएँ पिघल जाएंगी, अगर उनके सामने दुबकने के बजाय हम उनसे निडरतापूर्वक निपटने का मन बनाएँ”

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